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वित्तीय समावेशन

  वित्तीय समावेशन   भारतवर्ष में बैंक की शाखाएं ज्यादातर शहरी इलाकों में और कुछ हद तक अर्ध शहरी इलाकों तथा थोड़े बहुत ग्रामीण इलाकों में है। अभी भी सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सारे ऐसे इलाके हैं जहां तक बैंकों की पहुंच नहीं है।   किसी क्षेत्र का सर्वांगीण विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक बैंक खाता खोलने हेतु बैंक की शाखा , बीमा की सुविधा , बैंकिंग से संबंधित अन्य सुविधाएं , जैसे किसी बैंक के एक खाते से दूसरे बैंक के अन्य खाते में पैसा भेजना यानी रेमिटेंस , ऋण की सुलभता और वित्तीय सलाह से संबंधित सुविधा नहीं हो।   वित्तीय समावेशन क्या है   ऐसे क्षेत्र को जहां के लोग वित्तीय सुविधाओं से वंचित हैं , उसे फाइनेंसियल एक्सक्लूडेड यानी वित्तीय सुविधा रहित क्षेत्र कहा जाता है। इन वित्तीय सुबिधा रहित क्षेत्र में वहन करने योग्य खर्च पर वित्तीय सुविधा प्रदान कर सभी लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना वितीय समावेशन है। इस तरह का क्षेत्र सामाजिक उत्थान में पिछड़ा रह जाता है , जो वांछनीय नहीं है। इसका दुष्प्रभाव समाज और देश के विकास पर पड़ सकता है।   इसलिए...