Banking correspond guide series 1
बैंकिंग क्या है
बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के सेक्शन (5 बी) के अनुसार (as per Sec.5 (b) of the Banking Regulation Act, 1949) बैंकिंग की परिभाषा निम्न प्रकार से दी गयी है।
बैंकिंग का मतलब ऐसे कार्य से है जो जन साधारण से मुद्रा स्वीकार करता है ।
१) जो मांग किये जाने पर तुरंत वापस करने योग्य है ।
२) जो चेक ड्राफ्ट या निकासी पर्ची के द्वारा निकासी किया जा सकता है ।
३) जिस फण्ड का उपयोग बैंक द्वारा ऋण देने या निवेश करने के लिए किया जा सकता है।
४) जो अपने ग्राहक के चेक का कलेक्शन दूसरे बैंकों से करे ।
इसलिए ऐसी संस्था या या कॉर्पोरेट संस्था बैंक कहलाती है ।
बैंक ग्राहक कौन है
ग्राहक की कोई सटीक परिभाषा कहीं किसी स्टैच्यूट में नहीं दी गयी है ये शब्द कस्टम शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है निहित आदत या कोई खास तरह ग्रुप की आदतें ।
अर्थात कस्टमर का मतलब एक ऐसा ग्रुप जो खास कार्य करने वाले व्यक्तियो का असंगठित समूह है. जो बैंकिंग करने बैंक में आता है। दूसरे शब्दों में जो व्यक्ति बैंक में किसी तरह का खाता चाहे जमा खाता या ऋण खाता रखता है वो बैंक का ग्राहक है ।
ऐसा व्यक्ति जो बैंकिंग लेन देन जैसे चेक जमा करना, निकासी करना, ड्राफ्ट बनाना आदि के लिए बैंक आता है और उसका खता बैंक में नहीं है वो बैंक का ग्राहक नहीं है।
बैंक ग्राहक की परिष्कृत परिभाषा में उस व्यक्ति को भी रखा गया है जिसने बैंक को खता खोलने का फार्म जमा कर दिया परन्तु अभी तक खाता नहीं खुला है।
बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के सेक्शन (5 बी) के अनुसार (as per Sec.5 (b) of the Banking Regulation Act, 1949) बैंकिंग की परिभाषा निम्न प्रकार से दी गयी है।
बैंकिंग का मतलब ऐसे कार्य से है जो जन साधारण से मुद्रा स्वीकार करता है ।
१) जो मांग किये जाने पर तुरंत वापस करने योग्य है ।
२) जो चेक ड्राफ्ट या निकासी पर्ची के द्वारा निकासी किया जा सकता है ।
३) जिस फण्ड का उपयोग बैंक द्वारा ऋण देने या निवेश करने के लिए किया जा सकता है।
४) जो अपने ग्राहक के चेक का कलेक्शन दूसरे बैंकों से करे ।
इसलिए ऐसी संस्था या या कॉर्पोरेट संस्था बैंक कहलाती है ।
बैंक ग्राहक कौन है
ग्राहक की कोई सटीक परिभाषा कहीं किसी स्टैच्यूट में नहीं दी गयी है ये शब्द कस्टम शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है निहित आदत या कोई खास तरह ग्रुप की आदतें ।
अर्थात कस्टमर का मतलब एक ऐसा ग्रुप जो खास कार्य करने वाले व्यक्तियो का असंगठित समूह है. जो बैंकिंग करने बैंक में आता है। दूसरे शब्दों में जो व्यक्ति बैंक में किसी तरह का खाता चाहे जमा खाता या ऋण खाता रखता है वो बैंक का ग्राहक है ।
ऐसा व्यक्ति जो बैंकिंग लेन देन जैसे चेक जमा करना, निकासी करना, ड्राफ्ट बनाना आदि के लिए बैंक आता है और उसका खता बैंक में नहीं है वो बैंक का ग्राहक नहीं है।
बैंक ग्राहक की परिष्कृत परिभाषा में उस व्यक्ति को भी रखा गया है जिसने बैंक को खता खोलने का फार्म जमा कर दिया परन्तु अभी तक खाता नहीं खुला है।
Comments
Post a Comment